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बसंत........

लो नव बसंत आया ,
है नव उमंग लाया ,
शस्य श्यामला हुई धरा
चहुँ ओर फैली हरियाली ,
पक्षियों ने भी नव रूप धरा
हुई अब सृष्टि निराली ,
गगन नीलाभ हुआ
और जग हरषाया ,
कोयल ने पुनः मधुर
स्वर लहरी गाया ,
भर उठा ह्रदय नवीन स्पंदन से
हुई मधुर वाणी सरस इस रंग से ,
करने स्वागत इस ऋतू का
देखो देव भी है आया ,
करो सब मिल स्वागत कि है
पुनः नव

बसंत आया !!


रुपेश श्रीवास्तव
२८/०१/२०१२

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